त्योहार की रौनक के बीच नेताओं ने देश के समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। इस दौरान नीट (NEET) परीक्षा विवाद, बढ़ती महंगाई, गैस सिलेंडर के दाम और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक पार्टियां जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाकर धार्मिक विषयों की ओर मोड़ रही हैं। साथ ही बकरीद के संदेश को याद दिलाते हुए आपसी भाईचारे को मजबूत करने, नफरत को मोहब्बत से खत्म करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अपील की गई।



मिलजुलकर रहेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा
ईदगाह पहुंचे समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि नमाज के दौरान देश की तरक्की और अमन-चैन के लिए विशेष दुआ की गई। सभी ने संकल्प लिया कि देश निरंतर प्रगति करे और हर क्षेत्र में आगे बढ़े। समुदाय के लोगों का कहना था कि जब सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे को मजबूत करेंगे और मिलजुलकर रहेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा। हर नागरिक के सामूहिक प्रयास से ही भारत सच्चे अर्थों में ‘विश्व गुरु’ बन सकता है।
नीट परीक्षा विवाद और महंगाई पर बरसे नेता
एक तरफ जहां त्योहार की खुशियां थीं, वहीं दूसरी तरफ देश के मौजूदा हालात और राजनीति पर भी गंभीर चर्चा हुई। नेताओं ने कहा कि देश में धर्म के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि रोजगार जैसे मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
नीट (NEET) परीक्षा में करीब 22 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। इसके अलावा बढ़ती महंगाई और रसोई गैस सिलेंडर के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर भी खुलकर बात न होने की आलोचना की गई।
नेताओं ने आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि छोटे व्यापारी और रेहड़ी-पटरी वाले आर्थिक तंगी के कारण लगातार प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल जानबूझकर जनता का ध्यान इन बुनियादी मुद्दों से हटाकर धार्मिक विषयों की ओर मोड़ रहे हैं, ताकि असली सवालों पर बहस न हो सके।
नफरत का जवाब सिर्फ मोहब्बत
बकरीद के इस मौके पर नेताओं ने समाज से अपील की कि वे फिर से अपनी भाईचारक सांझ को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि समाज में फैली नफरत को केवल मोहब्बत से ही खत्म किया जा सकता है। हम सभी को प्यार का पैगाम लेकर आगे बढ़ना होगा।
जानिए क्या है बकरीद में कुर्बानी का महत्व
इस्लामिक मान्यता के अनुसार, नमाज के बाद बकरे या अन्य तय जानवरों की कुर्बानी देने की पुरानी परंपरा है। बकरीद को ‘ईद-उल-अजहा’ या ‘कुर्बानी वाली ईद’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मीठी ईद (ईद-उल-फितर) के बाद मुस्लिम समाज का दूसरा बड़ा त्योहार है।
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, यह पर्व जुल-हिज्जा महीने के 10वें दिन मनाया जाता है, जो कि मक्का की पवित्र हज यात्रा के समापन का प्रतीक भी है। इस साल 28 मई को बकरीद की मुख्य नमाज अदा की गई है, जबकि कुर्बानी का यह सिलसिला 28, 29 और 30 मई तक यानी तीन दिनों तक चलेगा।
इस त्योहार का असली संदेश यह है कि इंसान अपनी सबसे प्यारी चीज को खुदा की राह में कुर्बान करे। बकरीद में कुर्बानी का सच्चा आध्यात्मिक अर्थ पशुओं की बलि देने के साथ-साथ अपने भीतर के स्वार्थ, अहंकार, लालच और बुरी आदतों को छोड़कर एक नेक और सच्चा इंसान बनना है।
