अखंड केसरी ब्यूरो :- पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, **होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)** पर नियंत्रण को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वाशिंगटन ने सैन्य हमले फिर से शुरू किए, तो वह “नए उपकरणों और नए तरीकों” के साथ अमेरिका के खिलाफ **”नए मोर्चे”** खोल देगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तेहरान ने ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ के गठन की भी घोषणा की है, जो इस मार्ग से गुजरने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल और अन्य गतिविधियों की निगरानी करेगी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने राजनयिक बातचीत पर अविश्वास जताते हुए कहा कि अतीत के रिकॉर्ड को देखते हुए अमेरिका के साथ चर्चा की गुंजाइश कम है। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की वित्तीय कमर तोड़ने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है, जहाँ ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने सहयोगियों से ईरान के फंडिंग चैनलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया है। इस बीच, G7 देशों ने भी वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा का हवाला देते हुए इस मार्ग को खुला रखने और शत्रुता समाप्त करने पर जोर दिया है। कतर जैसे मध्यस्थ देश अभी भी कूटनीति के लिए समय मांग रहे हैं, ताकि इस क्षेत्र को एक बड़े विनाशकारी युद्ध से बचाया जा सके। वैश्विक नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकलेगा या पश्चिम एशिया एक नए और भीषण संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
