डीआरडीओ ने वायुसेना के साथ टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) हथियार का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे स्वदेशी रक्षा क्षमता मजबूत करने वाला बड़ा कदम बताया।
मई 08, नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने वायु सेना के साथ मिलकर ओडिशा तट के पास टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (टीएआरए) हथियार प्रणाली का पहला सफल फ्लाइट परीक्षण किया है। इस सिस्टम को हैदराबाद स्थित इमारात अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से डिज़ाइन और विकसित किया है। यह अत्याधुनिक कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है।
इस किट का निर्माण विकास सह उत्पादन साझेदारों (डीसीपीपी) और अन्य भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है। इसका उत्पादन कार्य शुरू कर दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों और वायुसेना की टीम को बधाई दी है।
टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA), एक मॉड्यूलर ग्लाइड वेपन सिस्टम है, इसका उद्देश्य ज़मीनी लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए कम लागत वाले हथियार की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाना है। TARA की रेंज ऑगमेंटेशन क्षमता से फाइटर एयरक्राफ्ट दुश्मन के एयर डिफेंस ज़ोन में घुसे बिना सुरक्षित दूरी से हमला कर सकेंगे। इससे भारतीय वायुसेना की “स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक” क्षमता कई गुना मजबूत होगी।
