हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय समुद्री शक्ति: सुरक्षा चुनौतियों के बीच 10 जहाजों का रणनीतिक प्रस्थान और भारत की ‘ऑपरेशन संकल्प’ नीति**

अखंड केसरी ब्यूरो :- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वर्तमान में वैश्विक राजनीति और व्यापार का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है, और इसी बीच भारत के 10 प्रमुख वाणिज्यिक जहाजों का यहाँ से सुरक्षित निकलना भारत की कूटनीतिक और सैन्य सतर्कता का एक बड़ा उदाहरण है। यह समुद्री मार्ग विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग एक-पांचवां हिस्सा संचालित करता है, जो इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए “जीवन रेखा” बनाता है। हालिया क्षेत्रीय तनावों को देखते हुए, भारतीय नौसेना ने इन जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत अपने अत्याधुनिक युद्धपोतों और लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों, जैसे P-8I, को तैनात किया है। इन 10 जहाजों में मुख्य रूप से कच्चे तेल के टैंकर और एलएनजी (LNG) वाहक शामिल हैं, जो खाड़ी देशों से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लौट रहे हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय निरंतर खाड़ी देशों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में “नेविगेशन की स्वतंत्रता” का पालन सुनिश्चित किया जा सके। यह न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की एक “नेट सुरक्षा प्रदाता” (Net Security Provider) के रूप में बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। जहाजों के इस बेड़े की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रीयल-टाइम सैटेलाइट ट्रैकिंग और समुद्री सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) के माध्यम से पल-पल की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे या समुद्री लुटेरों की गतिविधियों को समय रहते विफल किया जा सके.

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