सुनवाई से पहले जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो वीडियो भी सुनवाए। पेशी के लिए AAP के सभी सिख मंत्री और विधायक नंगे पैर लिखित स्पष्टीकरण के साथ अकाल तख्त पहुंचे। कांग्रेस, अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी सुनवाई में मौजूद रहे।

पहला सवाल: अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सीएम भगवंत मान के 2 बयान सुनवाए। जिनमें वह कह रहे हैं कि अगर बेअदबी करने वाला मानसिक रोगी हुआ तो उसके मां-बाप या कस्टोडियन को सजा मिलेगी। उन्होंने AAP मंत्री-विधायकों से पूछा कि क्या ये बात कानून में लिखी है।
कृषि मंत्री गुरमीत खुडि्डयां कोई स्पष्ट बात नहीं कर सके। इस पर विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि इस सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट नहीं करना चाहिए, यह संवेदनशील मसला है। इस पर अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा कि सीएम ने ही हर कार्रवाई का लाइव टेलीकास्ट करने को कहा था। इसके लिए अकाल तख्त को ललकारा भी था।
दूसरा सवाल: अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सरकार अपने कानून बनाए, अकाल तख्त को कोई एतराज नहीं लेकिन सिखों के लिए कोई कानून बने तो उसमें सिखों की राय लेनी चाहिए। उस कानून में शोध करनी थी तो हमें भी बुलाते। कानून में जो शोध की है उसके लिए क्या शिरोमणि कमेटी से कोई राय ली। इस पर AAP विधायक इंद्रवीर निज्जर ने कहा कि जब सुझाव मांगे थे तब एसजीपीसी को बुलाया था। निज्जर ने कहा कि कमेटी की तरफ से कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई। सरकार का मुझे नहीं पता। कांग्रेस MLA प्रताप बाजवा ने कहा कि मैंने इस बारे में सदन में मांग उठाई थी। स्पीकर ने नहीं मानी। आप विधायक जगरूप सिंह ने कहा कि कानून को सहमति दी। लेकिन पढ़ा नहीं। अकाली MLA गनीव कौर ने कहा कि ये (AAP) बोलने पर बेइज्जती करते हैं। विधायक कुलवंत सिंह ने कहा कि कानून नहीं पढ़ा।
जत्थेदार ने बताए एतराज
- बीड की जगह स्वरूप कहा: जत्थेदार ने कहा कि हमारा एतराज है कि कानून में बीड़ की जगह स्वरूप कहा। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बीड़ कहा जाता है। स्वरूप भी हमारा ही शब्द है। विधानसभा ने सिख शब्दावली बदलने की कोशिश की है। विधानसभा को सिख शब्दावली तय करने का हक नहीं है। बीड़ के साथ स्वरूप कहते तो कोई एतराज नहीं।
- कस्टोडियन वाली मद हटायी जाए: कस्टोडियन यानि संभालकर्ता। जिसको गुरु ग्रंथ साहिब दिया गया हो। कस्टोडियन शब्द तय करना आपका अधिकार नहीं है। यह श्री अकाल तख्त साहिब का अधिकार है। किसको स्वरूप देना किसको नहीं देना यह पंथ तय करेगा। कस्टोडियन वाली मद को हटाया जाए।
- यूनिक नंबर पर एतराज: स्वरूपों के लिए रजिस्टर बनाओ, यह तो पहले से है। गुरु ग्रंथ साहिब का यूनिक नंबर लगाने पर एतराज है। सिख रहित मर्यादा में लिखा है कि गुरमता विधानसभा नहीं करती पंथ करता है। तुम यूनिक नंबर के लिए सुझाव भेज सकते हो आदेश नहीं दे सकते। पंथ ही यह फैसला ले सकता है। यहां पर सरकार टेक्निकली गलत हो गई। इसमें कहा गया है कि वेबसाइट पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का रिकॉर्ड जारी करना मंजूर नहीं।
- कस्टोडियन के फर्ज तय करने पर एतराज: कस्टोडियन के फर्ज व जिम्मेदारियां तय करने पर एतराज है। कस्टोडियन की जिम्मेदारी होगी उसकी सुरक्षा करना। गुरु ग्रंथ साहिब किस तरह से रखना है यह विधानसभा तय नहीं करेगी। यह तय करने का हक पंथ का है। यह आपका अधिकार नहीं है। आप सुझाव देते कि अकाल तख्त ऐसे करे।
- सजा पर एतराज: बेअदबी करने वाले को सजा देने का अधिकार सरकार का है। लेकिन कानून में जो लिखा है कि बेअदबी करने के अलावा, इसमें जो अलावा लिखा है वो क्या है और वह किसके लिए है, यह स्पष्ट किया जाए। कस्टोडियन को सजा वाली मद पर अकाल तख्त को एतराज है।
- कानून में दुर्घटना की स्थिति का जिक्र क्यों नहीं: इसमें आपने यह नहीं लिखा कि अगर कोई दुर्घटना हो गई तो गुरुग्रंथ साहिब केस प्रॉपर्टी नहीं बनेगा। अकाल तख्त साहिब ने जो एतराज लगाए हैं एक महीने में उसे दूर करो यह आदेश है अकाल तख्त साहिब का।
वहीं पेशी से पहले अकाल तख्त पहुंचे जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा- अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा- पिछले काफी लंबे समय से खालसा पंथ की मर्जी के बिना और सिख संस्थाओं को बाईपास कर 2008 के कानून में संशोधन किया गया। गुरू और सिख के बीच कानून के जरिए सरकार आ गई है। सरकार ने हमारे धर्म में दखल दिया। अकाल तख्त की अथॉरिटी में दखल दिया, इसको लेकर सिख MLA और कैबिनेट को बुलाया।
पेशी से जुड़ी अहम बातें:-
- सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी क्यों हो रही?: अकाल तख्त ने सरकार के नए कानून पर एतराज जताया है। अकाल तख्त का कहना है कि कानून बनाने से पहले सरकार ने सिख धार्मिक संस्थाओं और अकाल तख्त से औपचारिक सलाह नहीं ली। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सरकार ने अकाल तख्त के पहले दिए गए निर्देशों की अनदेखी की। अकाल तख्त ने सिख मंत्रियों और विधायकों से पूछा है कि कमियों के बावजूद उन्होंने इस कानून का समर्थन किन आधारों पर किया और इस पर उनका पक्ष क्या है।
- सरकार का कानून को लेकर क्या तर्क हैं?: CM भगवंत मान का कहना है कि यह संगत की ही मांग थी कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए। इसी वजह से उम्रकैद और 50 लाख तक जुर्माने वाला कानून बनाया है। मान ने रविवार को फरीदकोट के गांव चंदबाजा में कहा कि अकाली दल नए बेअदबी कानून का विरोध इसलिए कर रहा है, क्योंकि उसे अपने पुराने कर्मों का जवाब देना पड़ेगा। मान ने कहा कि विरोध के बावजूद उनकी सरकार लोगों के हित में यह कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
