मां बगलामुखी जी के निमित सम्पूर्ण फलदाई मासिक हवन यज्ञ 31 मई रविवार को

जालंधर/जीवन भास्कर

मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान डाॅ नीता पालीवाल से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध मां बगलामुखी धाम में दिव्य हवन और मंत्रों की गूंज के बीच प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने संगत को गुरुवाणी का अमृतमयी संदेश सुनाते हुए कहा कि मनुष्य सारी उम्र इच्छाओं के पीछे भागता रहता है, लेकिन सच्ची तृप्ति केवल परमात्मा के नाम में ही मिलती है।
उन्होंने गुरुवाणी की पंक्तियों का अनुसरण करते हुए कहा
सभे इच्छा पूरीआ जा पाइआ अगम अपारा॥
जिनि गुरु पूरा आराधिआ तिन कारज सभि सवारा॥
उन्होंने समझाया कि इंसान बचपन से लेकर बुढ़ापे तक किसी न किसी चाहत में उलझा रहता है। कभी धन की इच्छा, कभी मान-सम्मान की, कभी सुख-सुविधाओं की। लेकिन इच्छाओं का अंत कभी नहीं होता। एक इच्छा पूरी होती है तो दूसरी सामने खड़ी हो जाती है। नवजीत भारद्वाज ने कहा कि गुरुवाणी हमें सिखाती है कि जिस जीव ने उस अगम, अपार परमात्मा को पा लिया, उसकी सारी इच्छाएं स्वत: शांत हो जाती हैं। यहां इच्छाओं के पूरे होने का अर्थ केवल संसारिक वस्तुएं मिलना नहीं, बल्कि मन की तृप्ति और आत्मिक शांति प्राप्त होना है।


उन्होंने कहा कि जैसे प्यासे को पानी मिलने पर उसकी भटकन समाप्त हो जाती है, उसी प्रकार जिस हृदय में प्रभु का नाम बस जाता है, उसकी आत्मा को सच्चा सुकून प्राप्त हो जाता है। फिर जीवन की कठिन परिस्थितियां भी उसे डिगा नहीं पातीं, क्योंकि उसके साथ गुरु का सहारा होता है।
श्लोक की दूसरी पंक्ति का अर्थ बताते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि जिसने पूरे गुरु का ध्यान किया और गुरु की शिक्षा को अपने जीवन में उतार लिया, उसके बिगड़े हुए कार्य भी प्रभु स्वयं संवार देते हैं। दुनिया में लोग साथ देने का वादा तो करते हैं, लेकिन समय आने पर कई लोग मुंह मोड़ लेते हैं। परंतु गुरु का दर ऐसा दरबार है, जहां से कोई खाली नहीं लौटता।
उन्होंने संगत को समझाया कि जब इंसान सच्चे मन से गुरु की शरण में आता है, नाम जपता है, सेवा करता है और अहंकार छोड़ देता है, तब उसकी जिंदगी बदलने लगती है। बंद रास्ते खुलने लगते हैं, टूटे हुए मन में विश्वास जागने लगता है और जीवन में नई रोशनी आ जाती है।
प्रवचन के अंत में नवजीत भारद्वाज ने कहा कि माया का सुख कुछ समय का होता है, लेकिन नाम का सुख हमेशा साथ रहता है। धन-दौलत, ऊंचे पद और संसार की चमक यहीं रह जाएगी, लेकिन गुरु की कमाई और नाम की दौलत ही आत्मा के साथ जाएगी। उन्होंने संगत से आह्वान किया कि हम सभी प्रभु से अरदास करें कि वह हमें ऐसा जीवन बख्शें, जिसमें हम दुनिया की चकाचौंध में खोने की बजाय गुरु के चरणों से जुड़ें, नाम का सिमरन करें, सेवा करें और अपने जीवन को सफल बनाएं।

धाम के सेवादार नवजीत ने बताया की मां बगलामुखी जी के निमित आलौकिक सम्पूर्ण फलदाई मासिक हवन यज्ञ का आयोजन 31 मई रविवार को सुबह 8:30बजे से किया जा रहा है उन्होंने सभी मां बगलामुखी जी की नाम लेवा संगत को इस शुभ अवसर पर सम्मिलित होने का आवहान किया।

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