जालंधर- जालंधर देहात पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आईपीएस बनकर ठगी करने वाले शातिर के खुलासे से पुलिस के होश उड़ गए। उसने ठगी के पैसे को अय्यासी में नहीं खर्च किया बल्कि बिजिनेश में इन्वेस्ट किया है। पुलिस न फर्जी आईपीएस बनकर ठगी करने वाले शातिर को 23 जून को तो उसकी पत्नी की आठ जुलाई को गि्रफ्तार किया है।
आरोपी आईपीएस (IPS) अधिकारी बताकर लोगों को शिकार बना रहा था। आरोपी ने पुलिस विभाग में डीएसपी, इंस्पेक्टर और हवलदार भर्ती कराने का झांसा देकर एक ही परिवार से 31.50 लाख रुपये ठग लिए। जिकी शिकायत पर पुलिस जांच को आगे बढ़ाते हुए पति पत्नी को गि्रफ्ता किया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से नकली दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल बरामद किए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी ने ठगी की इस रकम को कपड़ों के बिजनेस, कार और कोठी खरीदने में इन्वेस्ट किया था।
झांसा देकर ऐंठे लाखों रुपये
पिता के खाते में भेजे पैसे, पुलिस ने दबोचा
ठगी के बाद आरोपी अनमोल रतन फरार हो गया था। वह बेहद शातिर था और पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और मोबाइल नंबर बदल रहा था। इस दौरान उसने ठगी की रकम में से 3 लाख रुपये अपने पिता बलजीत सिंह के खाते में ट्रांसफर किए। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने आरोपी को पहले ही 23 जून 2026 को गिरफ्तार कर कपूरथला जेल भेज दिया था।
पत्नी भी हुई गिरफ्तार, 5 दिन का रिमांड
मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए शाहकोट थाना पुलिस और सीआईए (CIA) स्टाफ की टीमों ने टेक्निकल सेल की मदद ली। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी की पत्नी मनदीप कौर को भी 8 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट से दोनों आरोपियों का 5 दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है, ताकि ठगी के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।
लग्जरी लाइफ और बिजनेस में उड़ाए पैसे
पुलिस पूछताछ में आरोपी अनमोल रतन ने कबूल किया कि उसने आईपीएस अधिकारी के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। ठगी गई रकम का हिसाब देते हुए उसने बताया कि ₹17 लाख उसने शाहकोट में अपने एक करीबी रिश्तेदार की ‘ठाठ-बाठ’ रेडीमेड कपड़ों की दुकान में इन्वेस्ट किए थे। इसके अलावा ₹1.10 लाख से सियाज कार खरीदी और ₹10 लाख नकोदर में एक कोठी खरीदने के लिए दिए थे। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
