अखंड केसरी ब्यूरो :- भारत सरकार ने चीन और पाकिस्तान के बीच जारी किए गए हालिया संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अनावश्यक संदर्भों को पूरी तरह से और दृढ़ता से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज “733828.jpg” के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता श्री रणधीर जायसवाल ने एक सख्त प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि इन क्षेत्रों पर किसी भी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार (Locus Standi) नहीं है।
इसके साथ ही, भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं पर भी अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई है, क्योंकि इसका कुछ हिस्सा भारत के संप्रभु क्षेत्र के अंतर्गत आता है। भारत ने पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे को वैध बनाने या बढ़ावा देने के किसी भी देश के प्रयास का पुरजोर विरोध किया है और कहा है कि यह भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, दस्तावेज “733828.jpg” के मुताबिक, भारत ने दोनों देशों के बीच कथित ‘सीमा पार जल संसाधन सहयोग’ के दावों को भी खारिज कर दिया, क्योंकि चीन और पाकिस्तान आपस में कोई प्राकृतिक सीमा साझा नहीं करते हैं। भारत ने दोहराया है कि वह पाकिस्तान और चीन के बीच हुए 1963 के तथाकथित सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं देता। यह कड़ा संदेश स्पष्ट करता है कि भारत अपनी संप्रभुता से समझौता करने वाले किसी भी अंतर्राष्ट्रीय बयान को बर्दाश्त नहीं करेगा।
