डिप्टी कमिश्नर, एसएसपी, जेल मंत्री और सांसद की मौजूदगी में NDRF-SDRF ने दिखाया जज्बा; गांव चक समाना में खुशी का माहौल*
पंजाब (होशियारपुर) रमेश बदन, 15 मई:** होशियारपुर के नजदीकी गांव चक समाना में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब करीब 9 घंटे के बेहद जटिल और संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 4 साल के मासूम गुरकरण सिंह को बोरवेल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह घटना शुक्रवार शाम करीब 4 बजे की है, जब मजदूरी करने वाले हरिंदर और आशा का बेटा गुरकरण सिंह अपने घर के पास ही कल खोदे जा रहे एक खुले बोरवेल में अचानक गिर गया और करीब 30 फीट की गहराई पर जाकर फंस गया। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत एक्शन में आया और डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन व एसएसपी संदीप कुमार मलिक ने खुद मौके पर पहुंचकर शुरुआत से ही इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली।
मासूम की जान बचाने के लिए NDRF की 40 से अधिक सदस्यों वाली टीम, SDRF, पंजाब पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने रात-दिन एक कर दिया। इस बेहद नाजुक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए तुरंत भारी मशीनरी मौके पर मंगवाई गई। प्रशासन ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बोरवेल के ठीक बगल में 30 फीट से ज्यादा गहरा समानांतर गड्ढा खोदा। बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शाफ्ट के अंदर एक विशेष कैमरा और ऑक्सीजन पाइप उतारा गया, जिससे लगातार बच्चे की हरकतों पर नजर रखी जा रही थी। आखिरकार, रेस्क्यू टीमों ने बोरवेल के किनारे एक पतला रास्ता (टनल) बनाकर शाफ्ट तक पहुंच बनाई और देर रात करीब 12:40 बजे कड़ी मशक्कत के बाद गुरकरण को सकुशल बाहर निकाल लिया। बच्चे को सुरक्षित निकलते ही पूरा इलाका ‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों से गूंज उठा और उसे तुरंत मेडिकल जांच के लिए एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया।
इस पूरे संकट के समय पंजाब के जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और होशियारपुर के लोकसभा सदस्य (MP) डॉ. राज कुमार चब्बेवाल भी आखिर तक मौके पर डटे रहे और टीमों का हौसला बढ़ाते रहे। ऑपरेशन की सफलता के बाद डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन और एसएसपी संदीप कुमार मलिक ने NDRF की विशेषज्ञता, प्रशासनिक मुस्तैदी और स्थानीय ग्रामीणों के अटूट जज्बे की जमकर सराहना की। जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और सांसद डॉ. चब्बेवाल ने कहा कि यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सभी टीमों के पक्के इरादे और लगातार कोशिशों से एक मासूम की जान बचाई जा सकी। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी आगे आकर टीमों की हर संभव मदद की, जिससे इस संकट की घड़ी में इंसानियत की एक मिसाल कायम हुई।
