स्पीकर ने कहा कि वह साफ करना चाहते हैं कि कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी। वहीं नकोदर कांड की जांच भी वह कमेटी करेगी। बाजवा ने कहा कि केजरीवाल व भगवंत मान साहिब ने कहा था कि कुंवर प्रताप सिंह की रिपोर्ट के आधार पर 48 घंटे में दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचा देंगे। लेकिन कुछ नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि स्पीकर साहब वह हलका आपका था। इस पर स्पीकर ने कहा कि आपकी जानकारी उचित नहीं है। मौजूदा सरकार ने सबूतों से छेड़छाड़ की, जिससे आरोपियों को जमानत मिली। लेकिन हमने चालान पेश किया। वहीं आज सख्त कानून बनाने के लिए सेशन बुलाया है।
बाजवा ने कहा कि उस समय के पांच केस शहर से बाहर चले गए। सरकार ने विरोध नहीं किया। कुंवर विजय प्रताप सिंह पोस्टर बॉय था, वह पार्टी से बाहर है। मैं आपकी सरकार की इंटेंट जाना चाहता हूं। मान साहब दिल बड़ा कर इन पुलिस अफसरों पर कार्रवाई करो।
सीएम ने कहा कि आपका खजाना मंत्री व मुख्यमंत्री पार्टी से बाहर हैं। किसको मंत्री बनाना है या नहीं बनाना यह हमारा फैसला है। आपसे चार साल बाद प्रधानगी छीन ली है। किसी मौके पर तो कोई शर्म रख लिया करो। आज यह मौका नहीं है। इस पर बाजवा ने कहा आपसे लोग जवाब मांगते हैं। सीएम बताएं कि पंजाब पुलिस के कितने अफसरों पर केस दर्ज हुए। उन पर क्या कार्रवाई हुई।
उन्होंने कहा कि हम पांचवीं बार कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर हमने कानून माहिरों से बात की है। पहले की तरह इस बिल की स्थिति न हो। हम कानून का समर्थन करते हैं। हम लोागें के बीच ही रहे हैं। 25 साल आपको राज नहीं मिलना है। विधेयक पास होने के बाद इसे राज्यपाल को भेजा जाएगा। कानून के बनने पर बेअदबी में दोषी पाए जाने वाले को अधिकतम उम्रकैद और 25 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान होगा।
पंजाब में लंबे समय से बेअदबी की घटनाएं हो रही थीं। इस पर सख्त कदम उठाने के लिए सरकार ने बीते साल अप्रैल में पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक 2025 पेश किया था। जिसमें सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथ शामिल थे और सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक निर्धारित की गई थी। इसे सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया।
पंजाब में बेअदबी बड़ा मुद्दा क्यों है?
अकाली दल सत्ता से बाहर हुआ, विपक्ष तक की हैसियत नहीं बची
अकाली दल ने पूर्व CM स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में 2007 से 2017 तक BJP के साथ मिलकर लगातार 2 टर्म पंजाब में सरकार चलाई। उनके कार्यकाल के दौरान 2015 में बरगाड़ी बेअदबी और उससे जुड़ी घटनाएं हुईं। इसका असर ये हुआ कि 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल सत्ता से बाहर हो गया। पार्टी का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। कुल 117 विधानसभा सीटों में से 2017 में 15 सीटें और 2022 में 3 सीटें मिलीं। अकालियों की विपक्षी दल तक की हैसियत नहीं बची।
कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हुई
कांग्रेस ने 2017 के चुनाव में कहा था कि अगर सरकार बनी तो बेअदबी मामलों में इंसाफ दिलाया जाएगा। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुआई में 117 में से 77 सीटें जीतकर सरकार बना ली। हालांकि बेअदबी के इंसाफ के मामले में SIT बनाई। लेकिन दोषियों को कोई सजा नहीं मिली। 2022 में कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गई और सिर्फ 18 सीटें ही जीत सकीं।
AAP भी संकट में फंसी हुई
AAP ने 2022 के चुनाव में कहा था कि बेअदबी मामलों की जांच दोबारा खोली जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। CM भगवंत मान सरकार ने जांच प्रक्रिया को एक्टिव कर SIT को नए सिरे से बनाया। जांच और चार्जशीट आगे बढ़ी। लेकिन अभी कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। अभी तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली। हाल ही में कोटकपूरा गोलीकांड की सुनवाई फरीदकोट कोर्ट से चंडीगढ़ शिफ्ट हो गई। ऐसे में AAP भी बेअदबी को लेकर निशाने पर है।
