शब्द ब्यूरो, नई दिल्ली, 24 मई:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर किए गए दावों पर अब विवाद गहरा गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए घोषणा की थी कि ईरान के साथ शांति समझौते के लिए एक सहमति पत्र (MoU) को काफी हद तक अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जा सकता है। ट्रंप ने बताया कि इस समझौते के केवल कुछ अंतिम विवरणों पर चर्चा होना बाकी है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने यह बयान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और क्षेत्र के अन्य प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत के बाद साझा किया था।
हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ (Fars News Agency) ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच साझा किए गए हालिया मसौदे का हवाला देते हुए कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में बना रहेगा। ईरानी मीडिया ने ट्रंप के उस बयान को “अधूरा और वास्तविकता से परे” करार दिया, जिसमें उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को पूरी तरह से मुक्त तौर पर खोलने की बात कही थी। ईरान की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि वे केवल जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर पर लाने की अनुमति देने पर सहमत हुए हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वहां पहले की तरह मुफ्त आवाजाही (Free Passage) बहाल हो जाएगी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, जहाजों के मार्ग, समय और परमिट से जुड़े तमाम प्रबंधन के अधिकार विशेष रूप से केवल ईरान के पास ही सुरक्षित रहेंगे। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते पर दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों ने इस संभावित शांति समझौते पर फिलहाल सस्पेंस बढ़ा दिया है।
