अमेरिका-ईरान संघर्ष गहराया: हॉर्मुज़ जलडमरूमन्य की नाकेबंदी शुरू, अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान का पलटवार**

नई दिल्ली, 15 जुलाई:** अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को लगातार चौथे दिन ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए और देश के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह रोकने के लिए एक बार फिर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है जिनका उपयोग वे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने के लिए करते हैं। इन हमलों के तहत ईरान के बंदर अब्बास शहर के पश्चिम में कई विस्फोट सुने गए, वहीं खुज़ेस्तान की प्रांतीय राजधानी अहवाज़ और होर्मोज़गान प्रांत को भी अमेरिकी मिसाइलों ने निशाना बनाया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कार्गो शिपिंग पर 20% शुल्क लगाने की अपनी पिछली धमकी को तो वापस ले लिया है, लेकिन उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि यदि ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका अगले सप्ताह अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस शुल्क की भरपाई खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापारिक और निवेश समझौतों के माध्यम से की जाएगी।

दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों का करारा जवाब देते हुए अमेरिकी ठिकानों पर बड़े पलटवार किए हैं। ईरान ने जॉर्डन में स्थित एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जहाँ अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात हैं। इसके साथ ही, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हवाई और नौसैनिक हमले करने का दावा किया है। IRGC के एक बयान के अनुसार, उन्होंने बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर अमेरिकी हथियार डिपो, जहाजों और हेलीकॉप्टर के हिस्सों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका अपने “अपराधों” को बंद नहीं करता, तब तक उनकी यह जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी नए अमेरिकी हमले का सामना “आश्चर्यजनक प्रतिक्रियाओं” के साथ किया जाएगा। इस बीच, क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरानी नेताओं को सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने इजरायल पर हमला करने की हिमाकत की, तो इजरायल पिछली लड़ाइयों की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक तरीके से जवाबी कार्रवाई करेगा और ईरान को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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