शब्द, आकाशवाणी दिल्ली, 17 जुलाई:** खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संकट को देखते हुए भारत सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। जहाजरानी महानिदेशालय (DGMA) ने सभी जहाज मालिकों, शिपिंग प्रबंधकों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (RPSL) कंपनियों के लिए एक कड़ा सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किया है। इस एडवाइजरी में साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि वे अगले आदेश तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरने वाले किसी भी व्यापारिक जहाज पर भारतीय नाविकों (Seafarers) को तैनात करने से पूरी तरह परहेज करें। महानिदेशालय ने यह फैसला हाल के दिनों में व्यापारिक जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमलों और इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर तेजी से बिगड़े सुरक्षा हालातों का गहराई से मूल्यांकन करने के बाद लिया है।
DGMA ने अपनी एडवाइजरी में इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है कि संघर्ष प्रभावित खाड़ी क्षेत्र में हालिया हमलों ने वहां से गुजरने वाले कमर्शियल शिप्स और नाविकों के लिए जानमाल के जोखिम को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है। महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक व्यापार में अपनी सेवाएं दे रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और उनका कल्याण भारत सरकार और समुद्री प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकालीन संकट से निपटने के लिए DGMA ने एक पुख्ता इमरजेंसी सिस्टम भी सक्रिय किया है। महानिदेशालय ने सभी नाविकों और जहाजों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी प्रकार के खतरे की स्थिति में बिना वक्त गंवाए तुरंत ‘डीजी कम्युनिकेशन सेंटर’ (DG Communication Centre) या फिर भारतीय नौसेना के ‘इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन’ (IFC-IOR) से संपर्क स्थापित करें, ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक सैन्य या तकनीकी सहायता प्रदान की जा सके।
